बुधवार, 22 अप्रैल 2020

मैं और तुम




थोड़ी गीता पढ़ी है मैंने,
थोड़ा पढ़ा है कुरान भी
अच्छो के लिए अच्छे रहो,
बुरो के लिए बेईमान भी।

गीता में देखा मैंने अपनो का,
कृत्य कितना गंदा था।
कुरान में पढ़ा मैंने वो,
शैतान भी खुदा का बंदा था।

गलत को गलत कहूँगा,
चाहे बात मेरे धर्म की हो।
सबसे जरूरी ये होना चाहिए,
की बात सिर्फ अच्छे कर्म की हो।

मैं खुद अपनी बुराई को देखूं,
तुम अपनी बुराई खुद ढूंढ लेना।
पर जहाँ देखो बुराई तुम,
अपनी आंखे ना मूंद लेना।

लड़ना खूब बुराई से तुम,
चाहे फिर जीत हो या हार हो।
सब मिल जुल कर रहे तो,
कोई ना फिर लाचार हो।

अंत में कहूँ बस इतना सा,
कहत साहिल सुन भई यारो।
दूसरो को कुछ कहने से पहले,
अपने अंदर की बुराई को मारो।

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