गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

बीवी के बहाने

 


पल दो पल


 

इंतज़ार


 

ऐतबार


 

ना नफरत ना मोहब्बत


 

दिल की आरजू


 

कच्चा मकान

 


सोमवार, 20 अप्रैल 2026

वक्त गुजर गया



वक्त गुजर गया अब किसी से क्या शिकवा करूं
मोहब्बत थी उससे अब उसे क्यों रुसवा करूं
एक बस उसे छोड़ कर सब कुछ मिला मुझे
अब कुछ और की ख्वाहिश मैंं क्यों गवारां करूं
कुछ लम्हे थे जो अब कहानी बन गए
अब उस कहानी को मैं कितना संवारा करूं
मोहब्बत के खेल में हारा हुआ हूं मैं
अब मोहब्बत करने की कोशिश न दुबारा करूं

ये जो आजकल हम अब चुप चुप से रहते हैं

 


ये जो आजकल हम अब चुप चुप से रहते हैं
कुछ गिले शिकवे है दिल में जो दबा कर बैठे हैं
मोहब्बत इतनी थी तो फिर संभाली क्यों ना गई
लोग भी कहते हैं के हम दिल लगा बैठे हैं
वो जो देख कर ही मुस्कुराने लगते थे हमें
आज महफिल में भी नज़र चुरा कर बैठे हैं
नहीं भूल पाता हूं एक पल के लिए भी उसे
मेरे जहन पर इस कदर कब्जा जमाए बैठे हैं
दूर इतने हैं की नजर भी ना आए वो
करीब इतने की हमारे दिल में घर बनाए बैठे हैं

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