सोमवार, 20 अप्रैल 2026

ये जो आजकल हम अब चुप चुप से रहते हैं

 


ये जो आजकल हम अब चुप चुप से रहते हैं
कुछ गिले शिकवे है दिल में जो दबा कर बैठे हैं
मोहब्बत इतनी थी तो फिर संभाली क्यों ना गई
लोग भी कहते हैं के हम दिल लगा बैठे हैं
वो जो देख कर ही मुस्कुराने लगते थे हमें
आज महफिल में भी नज़र चुरा कर बैठे हैं
नहीं भूल पाता हूं एक पल के लिए भी उसे
मेरे जहन पर इस कदर कब्जा जमाए बैठे हैं
दूर इतने हैं की नजर भी ना आए वो
करीब इतने की हमारे दिल में घर बनाए बैठे हैं

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