ये जो आजकल हम अब चुप चुप से रहते हैं
कुछ गिले शिकवे है दिल में जो दबा कर बैठे हैं
मोहब्बत इतनी थी तो फिर संभाली क्यों ना गई
लोग भी कहते हैं के हम दिल लगा बैठे हैं
वो जो देख कर ही मुस्कुराने लगते थे हमें
आज महफिल में भी नज़र चुरा कर बैठे हैं
नहीं भूल पाता हूं एक पल के लिए भी उसे
मेरे जहन पर इस कदर कब्जा जमाए बैठे हैं
दूर इतने हैं की नजर भी ना आए वो
करीब इतने की हमारे दिल में घर बनाए बैठे हैं

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