मेरी एक बहुत अच्छी दोस्त थी। बहुत अच्छी लड़की थी, साफ दिल की, छल-कपट से दूर सीधी-साधी। वो मुझसे 10 मिनट मिलने के लिये आधा घन्टा इन्तजार किया करती थी। हमेशा मेरे लिये कुछ ना कुछ खाने को ले आया करती थी। मुझे कहने की देर थी की मेरा किस चीज़ को खाने का मन कर रहा है और वो पूरी मार्किट देख लिया करती थी पर मेरे लिये लाया जरुर करती थी।
सब कुछ ठीक था। बस उसकी एक आदत थी की वो छोटी छोटी बातों पर नाराज हो जाया करती थी। कभी कभी मैं मना लिया करता तो कभी कभी खुद ही मान जाया करती। कई बार तो ऐसा हुआ की मेरी कही बात को गलत तरीके से समझा और नाराज हो गयी। दोस्त ही तो थी तो मैने भी इतना ध्यान नहीं दिया या कह लू मुझे इतना फर्क नहीं पड़ा। फिर खुद ही मान भी जाती और मुझसे पूछती की मेरे बात ना करने से तुम्हे फर्क नहीं पड़ता ना? मैं बस मुस्कुरा कर जवाब को टाल देता। उस वक़्त मेरे बहुत से दोस्त हुआ करते थे इससे ज्यादा मैं उन्हे मनता था और इससे उनकी तारीफ भी करता था और ये चुप रहती थी। एक दो बार तो ऐसा हुआ की उनके लिये मैने इसे अन्धेखा किया। वो मेरे लिये सबको इग्नोर करती थी और मैं उसे ही इग्नोर कर देता था। फिर एक दिन वो ऐसी रूठी की मनाने से भी नहीं मानी। मैंने भी इतनी तवज्जो नहीं दी और सच कहूँ तो उस वक़्त मुझे इतना फर्क भी नहीं पड़ा। बहुत से दोस्त थे मेरे तो फर्क नहीं पड़ा। मैने उसके लिये कभी ना अच्छा सोचा और ना बुरा। अखिर वो सिर्फ एक दोस्त ही तो थी। उसे मुझसे प्यार तो नहीं था पर उसकी दोस्ती प्यार से कम भी नहीं थी।
उसने मेरा नम्बर कभी डिलीट नहीं किया और ना मैने किया। मैने कोशिश की उससे बात करने की लेकिन या तो वो जवाब ना देती या फिर बोलती की मेरा मन नहीं करता अब किसी से बात करने का। अकेले रहना अच्छा लगता है और तुमसे कोई शिकायत नहीं है, तुम बहुत अच्छे इन्सान हो पर अब हम दोस्त नहीं बन सकते।
जब वक़्त बदला और जिनके लिये मैने इसे इग्नोर किया उन्होने मुझे इग्नोर किया तो एहसास हुआ की मैने भी तो ये ही किया था। मैं जिन्हे खास समझता था उनके लिये जब मैं सिर्फ ऑप्शन रह गया तो समझ आया की दुख भी होता है। सबको अपने कर्म भोगने ही पड़ते हैं। अब जब ना मेरे इतने दोस्त है और ना किसी से इतनी बात होती है। अकेला होता हूँ तो अक्सर सोचता हूँ की कितनी अच्छी थी वो मेरे लिये। कौन सोचता है बिना स्वार्थ के इतना किसी के लिये। कभी समझ ही नहीं पाया की प्यार ना सही पर वो भी मुझसे वैसी ही दोस्ती की उमीद करती होगी जैसी वो मुझसे रखती थी पर मैने उसकी कदर तक ना की। किसी ने सच ही कहा है किसी भी चीज़ या इन्सान की कदर उसके मिलने से पहले और उसके खोने के बाद ही होती है। आज जब भी मैं उसके बारे में सोचता हूँ तो एक बहुत अच्छी सी फीलिंग आती है। जो मुझे एहसास दिलाती है की मैं उसके लिये बहुत खास था।
कभी उसके बारे में कुछ कहा ही नहीं। आज दिल कर रहा है उसका धन्यवाद करुँ और माफी माँगू जो मैने गलत किया।
धन्यवाद, आज भी तुम्हारी याद एक प्यारी सी फीलिंग ले कर आती है जिसको बताने के लिये मेरे पास शब्द नहीं है। और मैं माफी मांगता हूँ अपने गलत व्यवहार के लिये, तुम्हें ना समझने के लिये।
आप सब ध्यान रखिये अपना और खास कर उसका जो आपको खास समझता है, बहुत मुश्किल से मिलते हैं ऐसे लोग।
कभी कभी जिंदगी में किसी के साथ एक ऐसा अनजान रिश्ता बन जाता है, जिसका कोई नाम नहीं होता। उस रिश्ते में बस दूसरे की ख़ुशी देखी जाती है, तुम खुद को मिटा कर भी उसे खुश रखने की कोशिश करोगे
सोमवार, 10 जनवरी 2022
बुधवार, 5 जनवरी 2022
यादें
जिसे याद रहता है उसके लिये यादे हैं
जो भूल गया, उसके लिये कुछ भी नहीं
मानो तो जिन्दगी के कुछ हसीन लम्हे थे
अगर ना मानो तो, कुछ भी नहीं
खुद से भी ज्यादा मैने तुम्हे माना था
और तुम्हारे लिये मैं? शायद कुछ भी नहीं
मेरे लिये दोस्ती भी किसी खजाने से कम नहीं
तुम्हारे लिये दोस्ती, शायद कुछ भी नहीं
वक़्त ने ही सिखाया है साहिल को ये सब
खुद से भी ज्यादा मेरा, शायद कुछ भी नहीं
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