शुक्रवार, 11 नवंबर 2022

तेरा शहर भी अब



तेरा शहर भी अब थोड़ा वीराना सा लगता है
वो गुजरा हुआ किस्सा पुराना सा लगता है
बड़ा नाज़ हुआ करता था दोस्तो पर हमें
वो भी अब गुजरा हुआ जमाना लगता है
धीरे धीरे ही सही पर अब बदलेंगे हम भी
नहीं जरूरी सब रिश्तों को निभाना लगता है
कहते हैं सब मतलबी मुझे तो कहने दो
मतलबी तो मुझे भी ये जमाना लगता है
'साहिल' से ही रखते हैं अब उम्मीदें सारी
मुश्किल अब फिर से बिखर जाना लगता है

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