शुक्रवार, 9 मार्च 2018

ढूंढते रहे दिल हाथो में ले कर,

ढूंढते रहे दिल हाथो में ले कर, 
जमाने में हमें कहीं वफ़ा ना मिली।
वो चिराग इतराये बहुत खुद पर, 
जिन्हें जलने के बाद कभी हवा ना मिली ।

उसकी दीवानगी हमारे दिल पर
कुछ इस तरह से काबिज़ रही,
जैसे किसी बीमार को 
कभी कोई दवा ना मिली।

वो खुद जा कर डूब गया 
गहरे बीच समुन्द्र में,
शिकायत उसे बस ये रही कि 
उसे 'साहिल' की राह ना मिली।

ख्वाबों में भी मिलना


ख्वाबों में भी मिलना उसे गँवारा नहीं होता।
एक वो ही शक्स है तो हमारा नहीं होता।
कहने के लिए तो जमाना अपना है मगर।
टूटे हुए दिल का कोई सहारा नहीं होता।
जाने क्या कमी रह गयी है हम में,
हम सबके हो जाये भी तो कोई हमारा नहीं होता ।

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