सोमवार, 20 जून 2022

भ्रम


सब कुछ खो कर कुछ पाने का भ्रम था
देख मेरी जान मुझे तेरे होने का भ्रम था
कसम टूटी, विश्वास टूटा और भ्रम भी टूट गया
क्या ले कर आया मैं, क्या पीछे छूट गया
फरेबी को सब कुछ मिला, सच्चो को मिला फरेब
ईश्वर से कैसे छिपाओगे अपने सारे ऐब
जाना एक दिन सबने है, क्या ले कर जाओगे
किस तरह फिर उस ईश्वर से नज़रे मिलाओगे
सुंदर-सुंदर चेहरों में गजब की मक्कारी देखी है
जो बनते थे भोले बहुत उनकी होशियारी देखी है
मतलब के हैं रिश्ते सारे, मतलब का है अब जमाना
तुम भी रखो मतलब सबसे, दिल ना किसी से लगाना

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