सोमवार, 24 दिसंबर 2012

देश का स्वरुप



वक़्त बदल रहा है, 
मौसम बदल रहा है.
हर किसी का ख्वाब यहाँ, 
भट्टी में जल रहा है.

कही लूटी जाती है आबरू, 
कोई भूख से मर रहा है.
जान बाकि नहीं है देश में,
पर देखो ये फिर भी चल रहा है.

कही पर गरीब-नंगे लोग यहाँ,
कही पर होते करोड़ो के घोटाले,
इस देश को चला रहे है, 
जो हैं इसे डुबोने वाले.

किसी को रहने को घर नहीं,
कोई लाखो के सौचालय बनवा रहा है,
रूह कांप उठती है ये देख कर,
भाई भाई का खून बहा रहा है.

जहा भी देखो देश में, 
बस भ्रष्टाचार का बोल बाला है,
दामन हैं सबके साफ़ यहाँ,
बस हृदय ही इनका काला है.
परवाह नहीं इनको की कोई,
आग पर चल रहा है.
इस देश का अब स्वरुप बदल रहा है.

मेरा हाल


उससे बिछड़ कर हाल कुछ ऐसा हुआ,
मर भी गया मैं, और जिन्दा भी रहा !
रहता हूँ हमेशा भीड़ और महफ़िल में,
पर फिर भी मैं सायद तनहा ही रहा !
उसके बाद भी बने हैं, बहुत से अपने,
पर इस दिल का क्या जो सिर्फ उसका ही रहा !
दिल के हर कोने में उसकी याद बसी है,
बस वो मेरा अपना अब अपना नहीं रहा !
रिश्ते अब सिर्फ नाम के रह गए हैं,
अफ़सोस होता है की अब वो वक़्त नहीं रहा !
खुदा से की जब शिकायत इस बात की,
उसने भी कह दिया - इन्सान अब इन्सान नही रहा !

सोमवार, 10 दिसंबर 2012

आओ दोस्तों आज कुछ नया करते हैं

 
आओ दोस्तों आज कुछ नया करते हैं,
न रंग है, न उमंग है
आज जिंदगी में कुछ रंग भरते हैं
आओ दोस्तों आज कुछ नया करते हैं.

या तो उढ़ जाते हैं दूर गगन में,
या फिर समुन्द्र की गहराई को छू लेते हैं
या फिर भूल जाते हैं सारे गम
हम पल दो पल जी लेते हैं.
कुछ न कुछ तो आज जरूर करते हैं,
आओ दोस्तों आज कुछ नया करते हैं.

बिखर जाते हैं फूल बनकर, राहो में,
या किसी के रास्ते के कांटे चुन लेते हैं,
आज बैठते हैं अपने परिवार के साथ,
और उनसे उनके सुख दुःख सुन लेते हैं
आज कुछ न कुछ ऐसा जरूर करते हैं,
आओ दोस्तों आज कुछ नया करते हैं.

आज मिट जाते हैं वतन पर,
या देश के लिए आज शहीद हो जाये,
या बन जाते हैं देश के प्रधान मंत्री,
और देश को हम खुद चलाये,
आओ आज देश का कुछ भला करते हैं,
आज कुछ न कुछ तो जरूर करते हैं,
आओ दोस्तों आज कुछ नया करते हैं,
जिंदगी में कुछ रंग भरते हैं,
आओ दोस्तों आज कुछ नया करते हैं.

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