सोमवार, 20 अप्रैल 2026

वक्त गुजर गया



वक्त गुजर गया अब किसी से क्या शिकवा करूं
मोहब्बत थी उससे अब उसे क्यों रुसवा करूं
एक बस उसे छोड़ कर सब कुछ मिला मुझे
अब कुछ और की ख्वाहिश मैंं क्यों गवारां करूं
कुछ लम्हे थे जो अब कहानी बन गए
अब उस कहानी को मैं कितना संवारा करूं
मोहब्बत के खेल में हारा हुआ हूं मैं
अब मोहब्बत करने की कोशिश न दुबारा करूं

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