मंगलवार, 27 अगस्त 2019

अकेले में


अकेले में जब गीता गुनगुनाते हैं 
बेवजह ही हम अक्सर मुस्कुराते हैं
जब किसी के इन्तज़ार में 
पल पल गिन कर वक़्त बिताते हैं 
जब किसी के तस्सवुर के लिये
हम भीड़ में भी खो जाते हैं 
हम जगते रहते हैं रातो को
फिर ऐसे ही जाने कब सो जाते हैं 
ऐसा ही होता है अक्सर जब हम,
मोहब्बत के खवाबों मे खो जाते हैं


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