गुरुवार, 8 अक्टूबर 2020

ये तेरा शहर


ये 
तेरा शहर इतना वीरान सा क्यूँ है
हर शक्स यहाँ परेशान सा क्यूँ है
तेरे साथ रह कर मुझे वक़्त का होश नहीं
अभी थी सुबह तो अभी शाम क्यूँ है
ये जो ताना देते हैं की मैं नशे में हूँ
फिर इनके सबके हाथ में जाम क्यूँ है
टुकड़ो में जिया करते हैं कुछ लोग यहाँ
किश्मत के आगे इंसान यहाँ गुलाम क्यूँ है
कुछ लोग कत्ल करके भी हुए ना मशहूर
इश्क़ करने वाला ही यहाँ बदनाम क्यूँ है
बुरा तो सिर्फ 'साहिल' ही नहीं यहाँ लेकिन
फिर हर शक्स की जुबां पर बस मेरा नाम क्यूँ है

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