शनिवार, 26 जून 2010

याद

ये खुशबु का झोंका कहाँ से आया है, 
कौन इन हवाओं को अपने साथ लाया है, 
मना है यहाँ अंधेरों का भी आना, 
ये उजाले यहाँ कौन लाया है। 
गिरी नहीं कभी यहाँ बारिश की बूंदे, 
समुन्द्रों को यहाँ का पता किसने बताया है, 
बोला नहीं मैं यहाँ कई वर्षों से, 
आज हमें किसने रुलाया है। 
यहाँ कोई आवाज नहीं सुनी कभी, 
ये गीत यहाँ किसने गया है। 
अकेला रहता हूँ मैं यहाँ पर, 
ये किसका साथ हमने पाया है। 
ये सब बातें मैं अब समझ पाया हूँ, 
जिसे हम भूल चुके हैं वो याद आया है।

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