शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

तुम और मैं


तुम वक़्त सी कभी रुकी नहीं
मैं हवाओं सा आज़ाद रहा
दुनिया को भूल बैठा मैं
बस एक तेरा नाम याद रहा

तुम नाज़ुक कली गुलशन की
मैं भँवरे सा आवारा हूँ
सारा जहाँ बेशक मेरा रहे
मैं फिर भी बस तुम्हारा हूँ

तुम चाँद की रोशनी जैसी
मैं सर्दी की एक रात हूँ
तुम मेरी जिंदगी की दास्तां हो
मैं बस एक भूली-बिछड़ी याद हूँ

एक तुम्हारा चेहरा 
एक मेरे दिल की आरजू 
दोनो ही बड़े प्यारे है
लगता है कुछ ऐसा
हम दोनो नदी के दो किनारे है

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