तुम वक़्त सी कभी रुकी नहीं
मैं हवाओं सा आज़ाद रहा
दुनिया को भूल बैठा मैं
बस एक तेरा नाम याद रहा
तुम नाज़ुक कली गुलशन की
मैं भँवरे सा आवारा हूँ
सारा जहाँ बेशक मेरा रहे
मैं फिर भी बस तुम्हारा हूँ
तुम चाँद की रोशनी जैसी
मैं सर्दी की एक रात हूँ
तुम मेरी जिंदगी की दास्तां हो
मैं बस एक भूली-बिछड़ी याद हूँ
एक तुम्हारा चेहरा
एक मेरे दिल की आरजू
दोनो ही बड़े प्यारे है
लगता है कुछ ऐसा
हम दोनो नदी के दो किनारे है
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