रविवार, 2 सितंबर 2018

दिल की बात

ये तो दिल की बात है की मैं क्या लिखता हूँ
कभी कहानी कोई तो कभी ग़ज़ल लिखता हूँ
बड़ा मासूम है वो भी जो दगा दे गया, 
बेवफा लिखता हूँ तो कभी उसे वफा लिखता हूँ
सीखा है हमने हर गम में मुस्कुराना, 
कभी जख्म दिलो के तो कभी दवा लिखता हूँ
बस यूँ ही कट रही है ज़िन्दगी अपनी,
कभी रिश्ते नए तो कभी दोस्त पुराने लिखता हूँ

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